लवन में रेत माफिया बेलगाम, नाबालिग चला रहे ‘मौत के ट्रैक्टर’
प्रशासन की खामोशी से फल-फूल रहा अवैध कारोबार
संवाददाता – धनकुमार कौशिक/ बलौदा बाजार
बलौदाबाजार (डोंगरा)।
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले का लवन क्षेत्र इन दिनों रेत माफिया के कब्जे में जाता दिखाई दे रहा है। अवैध रेत खनन और परिवहन इस कदर बेकाबू हो चुका है कि कानून, नियम और प्रशासन—तीनों बौने नजर आने लगे हैं। हालात ऐसे हैं कि सड़कों पर रेत से लदे ट्रैक्टर फर्राटा भर रहे हैं और हैरानी की बात यह है कि कई ट्रैक्टरों की स्टेयरिंग नाबालिगों और बिना हेवी लाइसेंस वाले युवकों के हाथों में थमा दी गई है।

नया थाना प्रभारी, लेकिन माफिया बेखौफ
हाल ही में लवन थाना प्रभारी के रूप में पदस्थ हुए प्रमोद कुमार सिंह ने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा जरूर दिलाया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रेत तस्करी में लगे लोग अब भी खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह भरोसा सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा या रेत माफिया सच में पुलिस की रडार पर आएंगे?

खनिज विभाग सक्रिय, स्थानीय जिम्मेदार मौन
जिला खनिज विभाग द्वारा समय-समय पर की गई कार्रवाइयों से यह स्पष्ट है कि विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर तहसील प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अवैध रूप से रेत ढोते ट्रैक्टर रोज सड़कों पर दौड़ते दिखते हैं, फिर भी कार्रवाई न होना प्रशासनिक उदासीनता या मिलीभगत—दोनों में से किसी एक की ओर इशारा करता है।
नाबालिगों के हाथों स्टेयरिंग: कानून का खुला मज़ाक
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत माफिया ने बच्चों की जान को दांव पर लगा दिया है। नाबालिगों द्वारा हाई-स्पीड ट्रैक्टर चलाए जा रहे हैं, जो कभी भी बड़े हादसे में तब्दील हो सकते हैं। यह सीधे-सीधे मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
हाई स्पीड ट्रैक्टर से दहशत, जनता खामोश
लवन और आसपास के गांवों में बुजुर्ग, महिलाएं और राहगीर दहशत में हैं। खेतों से लेकर बाजार और मुख्य सड़कों तक, हर जगह रेत से लदे ट्रैक्टर मौत बनकर दौड़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने का मतलब माफियाओं से दुश्मनी मोल लेना है, इसलिए लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं।
सूत्रों का सनसनीखेज दावा: लोडिंग के नाम पर वसूली
सूत्रों का दावा है कि रेत घाटों पर बाहुबल के दम पर अवैध खनन किया जा रहा है। एक-एक ट्रैक्टर की लोडिंग के लिए 200 से 500 रुपये तक की कथित वसूली होती है। जिन घाटों का संचालन आधिकारिक रूप से बंद है, वहां भी खुलेआम रेत निकाली जा रही है—जो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है।
रॉयल्टी शून्य, नुकसान करोड़ों का
हाईवे पर बिना रॉयल्टी की रेत से लदी गाड़ियां खुलेआम दौड़ रही हैं। इससे शासन को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं अवैध कारोबार को संरक्षण मिल रहा है।
तिल्दा से लवन तक अवैध रेत की एक्सप्रेस लाइन
जानकारी के अनुसार तिल्दा क्षेत्र से रोजाना अवैध रेत लोड कर ट्रैक्टरों की कतारें लवन की ओर बढ़ती हैं। पूर्व में जिला कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बाद तिल्दा के रेत तस्करों को जेल भेजा गया था, लेकिन अब वही तस्कर प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए दोबारा सक्रिय हो चुके हैं।
खेती-बाड़ी के नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टरों का खुलेआम व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। लगभग हर ट्रैक्टर रेत परिवहन में लगा हुआ बताया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है।
अब सवाल साफ हैं—
नाबालिगों के हाथों ट्रैक्टर की स्टेयरिंग कब छीनी जाएगी?
बिना रॉयल्टी दौड़ती गाड़ियों पर कब ब्रेक लगेगा?
रेत माफिया के इस संगठित नेटवर्क पर कब निर्णायक कार्रवाई होगी?
फिलहाल लवन क्षेत्र में रेत माफिया का यह बेलगाम खेल प्रशासन के लिए नहीं, बल्कि उसकी साख और संवेदनशीलता के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है। जनता अब जवाब नहीं, ठोस कार्रवाई चाहती है।







