शिक्षकों व रसोइयों की हड़ताल से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और मध्यान्ह भोजन ठप
संवाददाता | छत्तीसगढ़ दस्तक 24
छत्तीसगढ़ कर्मचारी–अधिकारी फेडरेशन के आवाहन पर 29 दिसंबर से 31 दिसंबर तक प्रदेशभर के शासकीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षक कलम बंद–काम बंद हड़ताल पर चले गए हैं। शिक्षकों की अनुपस्थिति के चलते कई सरकारी स्कूलों में ताले लटक गए हैं, जिससे पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे बिना शिक्षक के पढ़ाई करने को विवश हैं और शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है।

हड़ताल की मार यहीं तक सीमित नहीं रही। स्कूलों में मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाले रसोइया एवं सहायक भी अपनी मांगों को लेकर 30 दिसंबर से अनिश्चितकालीन प्रदेश स्तरीय हड़ताल पर चले गए हैं। इसके चलते अब कई स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना भी बंद हो गई है।
एक साथ शिक्षकों और रसोइयों के हड़ताल पर चले जाने से शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। न तो उन्हें नियमित शिक्षा मिल पा रही है और न ही पौष्टिक भोजन। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों से आने वाले बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
शिक्षा बाधित होने से पाठ्यक्रम पिछड़ रहा है, वहीं मध्यान्ह भोजन बंद होने से बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति लगातार घट रही है, जिससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो बच्चों का भविष्य गंभीर संकट में पड़ सकता है। वहीं, जानकारों का मानना है कि शासन–प्रशासन को शीघ्र हस्तक्षेप कर संवाद के माध्यम से समस्या का समाधान निकालना चाहिए, ताकि स्कूलों में पढ़ाई और मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पुनः सुचारु हो सके।
फिलहाल, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे राम भरोसे नजर आ रहे हैं और शिक्षा व पोषण दोनों से वंचित होने की स्थिति बन गई है।







