5 महीने से ठंडे बस्ते में कार्रवाई: उपसरपंच के अतिक्रमण पर प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल..

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5 महीने से ठंडे बस्ते में कार्रवाई: उपसरपंच के अतिक्रमण पर प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल..

कलेक्टर के निर्देश पर जांच में खुला 32 डिसमिल से अधिक जमीन पर कब्जे का मामला, फिर भी नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई

संवाददाता…धनकुमार कौशिक.. छत्तीसगढ़ दस्तक

बलौदाबाजार(डोंगरा)

जिले में शासकीय जमीन पर अतिक्रमण का एक गंभीर मामला सामने आने के बावजूद प्रशासन की सुस्ती ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 17 अगस्त को कलेक्टर के पास की गई शिकायत के बाद उनके निर्देश पर राजस्व विभाग ने उपसरपंच मनोज कैवर्त्य के खिलाफ जांच की थी। जांच में खुलासा हुआ कि उपसरपंच ने 32 डिसमिल से अधिक शासकीय भूमि पर कब्जा कर रखा है।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि जांच के 5 महीने बीत जाने के बाद भी न तो अवैध कब्जा हटाया गया और न ही उपसरपंच को पद से बर्खास्त किया गया। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

जांच हुई, लेकिन कार्रवाई गायब

कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच में जब अतिक्रमण की पुष्टि हो गई, तो उम्मीद थी कि राजस्व विभाग तत्काल कार्रवाई करेगा। मगर महीनों बीत जाने के बाद भी मामला जस का तस पड़ा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग की कछुआ चाल और सांठगांठ के चलते रसूखदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, जबकि गरीबों के मामलों में तुरंत सख्ती दिखाई जाती है।

तहसीलदार का एक ही जवाब

इस पूरे मामले में तहसीलदार पेनका टोन्डरे से जब भी सवाल किया जाता है, तो उनका वही रटा-रटाया जवाब मिलता है—

“एक-दो दिन में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होगी।”लेकिन यह “एक-दो दिन” पिछले पांच महीनों से नहीं आया है।

पीएम आवास योजना पर भी सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि शासकीय भूमि पर कब्जा करने वाले उपसरपंच को ही पीएम आवास योजना का लाभ दिलाया गया, इसमें पूर्व सरपंच और रोजगार सहायक की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह गरीबों के अधिकारों पर डाका डाला गया है।

प्रशासन की निष्क्रियता पर उठे सवाल

जांच में अतिक्रमण साबित होने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?

क्या रसूखदार होने के कारण उपसरपंच को संरक्षण मिल रहा है?

गरीबों पर तुरंत कार्रवाई और प्रभावशाली लोगों पर चुप्पी क्यों?

पीएम आवास का लाभ अतिक्रमणकारी को कैसे मिला?

इस पूरे मामले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इस मामले में ठोस कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

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