सोन नदी के तट पर उमड़ा आस्था का महासंगम
ढोल–मृदंग, रामायण पाठ और विशाल भंडारे के साथ मकर संक्रांति मेले का ऐतिहासिक समापन
आशीष श्रीवास/गौरेला–पेंड्रा–मरवाही/15–01–2026
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर क्षेत्र में आयोजित पारंपरिक मेलों का गुरुवार को अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ समापन हुआ। मकर संक्रांति भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है, जिसे देश के विभिन्न राज्यों में अलग–अलग नामों से मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में यह पर्व विशेष उत्साह और लोक परंपराओं के साथ मनाया जाता है। इस दिन पतंगबाजी, तिल के लड्डू, पारंपरिक व्यंजन, पूजा–अर्चना और मेलों का आयोजन ग्रामीण जनजीवन में नई ऊर्जा और उल्लास भर देता है।

इसी क्रम में सोन नदी के पावन तट पर स्थित प्रसिद्ध शिव घाट बंशीताल (दानीकुण्डी) में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी 14 एवं 15 जनवरी को दो दिवसीय मकर संक्रांति मेले का भव्य आयोजन किया गया। यह मेला क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। मेले में आसपास ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण परिवार और युवा वर्ग पहुंचे। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में मेले को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।

मेले के दौरान पारंपरिक दुकानों, खान-पान के स्टॉल, घरेलू उपयोग की वस्तुओं और मनोरंजन के साधनों ने मेले की रौनक बढ़ा दी। पतंगबाजी, आपसी मेल-मिलाप और लोक संस्कृति की झलक ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। मेले की शुरुआत जहां भक्ति और उमंग के साथ हुई, वहीं इसका समापन भी पूरी धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप किया गया।
गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को मेले के अंतिम दिन ढोल–मृदंग की गूंज के बीच रामायण पाठ का आयोजन किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया। इसके पश्चात शिव मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। शिवभक्ति और सेवा भाव से ओतप्रोत इस भंडारे में सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
भंडारे के सफल आयोजन में ग्राम के जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर सहयोग प्रदान किया। वहीं बोल बम युवा संगठन के कार्यकर्ताओं ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली। संगठन के युवाओं द्वारा अनुशासित ढंग से श्रद्धालुओं का स्वागत, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और प्रसाद वितरण किया गया, जिसकी उपस्थित जनसमूह ने भूरी-भूरी प्रशंसा की।
मेले के दौरान बोल बम युवा संगठन एवं ग्रामवासियों द्वारा सभी आगंतुकों का आत्मीय स्वागत किया गया तथा उनके सहयोग और सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया गया। आस्था, संस्कृति, सेवा और जनभागीदारी से सजा यह मकर संक्रांति मेला वर्ष 2026 में क्षेत्रवासियों के लिए एक अविस्मरणीय आयोजन बन गया। अब लोग पूरे वर्ष इस मेले की स्मृतियों को संजोए रखते हुए अगले वर्ष फिर से इस पावन पर्व और मेले के आगमन का बेसब्री से इंतजार करेंगे।







