न्याय पंचायत या अवैध वसूली का साम्राज्य?
केंवट-निषाद समाज में ‘सामाजिक न्याय’ के नाम पर लाखों की कथित उगाही, भय से खामोश पीड़ित, पलायन को मजबूर परिवार
संवाददाता… धनकुमार कौशिक
छत्तीसगढ़ दस्तक 24, बलौदा बाजार
बलौदाबाजार।केंवट-निषाद समाज में न्याय और सामाजिक अनुशासन के नाम पर संचालित की जा रही तथाकथित न्याय पंचायत अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। तलाक, विजातीय विवाह, सगाई टूटने जैसे मामलों को निपटाने के नाम पर कथित अवैध वसूली, डर-धमकी, सामाजिक बहिष्कार और मानसिक उत्पीड़न के आरोप सामने आ रहे हैं। मामला इतना गंभीर बताया जा रहा है कि समाज के भीतर भय का माहौल बन गया है और कई परिवार पलायन को मजबूर हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार अर्जुन निषाद, नारायण कैवर्त्य, खेदूराम निषाद, जोतराम निषाद, सत्यवान कैवर्त्य, मोहित कैवर्त्य, डॉ. पुरुषोत्तम कैवर्त्य, गणेश केंवट, ननकू राम निषाद सहित कुछ लोग स्वयं को समाज का सर्वेसर्वा घोषित कर बिना किसी वैधानिक या पंजीकृत अधिकार के सामाजिक फैसले सुना रहे हैं और इसके एवज में अमानत, दंड या सामाजिक शुल्क के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं।
खुद ही शिकायत, खुद ही जज, खुद ही फैसला
सूत्र बताते हैं कि इन कथित सामाजिक ठेकेदारों द्वारा शिकायतें सुनी जाती हैं, फैसला सुनाया जाता है और फिर उसी फैसले के आधार पर आर्थिक दंड वसूला जाता है। आरोप है कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में लाखों रुपये की वसूली की गई, लेकिन आज तक समाज के सामने कोई लेखा-जोखा, बिल-वाउचर या पारदर्शी हिसाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
बहिष्कार की धमकी से दबाए जा रहे लोग
पीड़ित परिवारों का कहना है कि हुक्का-पानी बंद करने, समाज से बाहर करने और सामाजिक बहिष्कार जैसी धमकियां देकर उन्हें चुप रहने को मजबूर किया जाता है। भय के कारण कई लोग सामने आने से कतरा रहे हैं।
2 दिसंबर का मामला: डराकर शादी और दोबारा वसूली
जानकारी के अनुसार 2 दिसंबर को एक निषाद परिवार से कथित तौर पर हजारों रुपये वसूले गए। आरोप है कि परिवार को दबाव में लेकर शादी कराई गई और बाद में फिर से अवैध वसूली की गई। इसके बाद लगातार धमकियां दी जाती रहीं।
विजातीय विवाह और सगाई टूटने के मामलों में भी उगाही का आरोप
सूत्रों के मुताबिक विजातीय विवाह से जुड़े कम से कम दो मामलों में कथित रूप से भारी आर्थिक दंड वसूला गया।
एक मामले में विजातीय विवाह प्रकरण में ₹10,000 अमानत लेने का आरोप।
दूसरे मामले में सगाई टूटने पर ₹8,500 अमानत वसूली की बात सामने आई है।
04 जनवरी 2025 को एक अन्य प्रकरण कथित रूप से इन्हीं लोगों द्वारा निपटाया गया।
इन सभी मामलों में वसूली गई राशि का उपयोग कहां हुआ, इस पर अब तक कोई जवाब या पारदर्शिता नहीं है।
समाज सेवा नहीं, शोषण का आरोप
आरोप यह भी है कि जिन लोगों ने स्वयं को समाज का नेतृत्वकर्ता बताया, उन्होंने समाजहित में कोई ठोस कार्य नहीं किया। उल्टा गरीब और कमजोर परिवारों पर आर्थिक बोझ डालकर उन्हें कर्ज, भय और मानसिक दबाव में धकेल दिया गया।
पलायन की बड़ी वजह बना कथित सामाजिक आतंक
स्थानीय लोगों का कहना है कि परिक्षेत्र के कई गांवों से केंवट-निषाद समाज के परिवार गांव छोड़कर अन्य स्थानों पर बसने को मजबूर हो रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यही कथित वसूली और डर का माहौल बताया जा रहा है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
समाज के जागरूक नागरिकों और पीड़ित परिवारों ने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष व गहन जांच की मांग की है, ताकि समाज सेवा के नाम पर चल रहे कथित शोषण पर रोक लग सके।
अब सबसे बड़ा सवाल
क्या न्याय पंचायत की आड़ में चल रही कथित अवैध वसूली पर प्रशासन शिकंजा कसेगा?
क्या पीड़ित परिवारों को न्याय मिलेगा या डर उन्हें खामोश बनाए रखेगा?
फिलहाल, केंवट-निषाद समाज के भीतर उठ रही यह आवाज़ बड़े खुलासों और प्रशासनिक कार्रवाई की ओर इशारा कर रही है।







