राज्य स्तरीय डांस प्रतियोगिता में ‘हमर छत्तीसगढ़’ बसना ने जीता प्रथम पुरस्कार

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राज्य स्तरीय डांस प्रतियोगिता में ‘हमर छत्तीसगढ़’ बसना ने जीता प्रथम पुरस्कार

संवाददाता : धनकुमार कौशिक
छत्तीसगढ़ दस्तक 24 | बलौदा बाजार

कोलिहा मड़ई मेला में संस्कृति की जीत
बलौदा बाजार (डोंगरा)
बलौदा बाजार जिले के ग्राम पंचायत कोलिहा में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय मड़ई मेला एवं डांस प्रतियोगिता में इस वर्ष भी लोकसंस्कृति, परंपरा और कला का भव्य संगम देखने को मिला। ग्रामीण युवाओं द्वारा पिछले नौ वर्षों से लगातार आयोजित इस सांस्कृतिक आयोजन में छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से आए सैकड़ों कलाकारों ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।


कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं श्रीफल फोड़कर विधिवत रूप से किया गया।
मुख्य अतिथि पवन कुमार साहू (उपाध्यक्ष, जिला पंचायत बलौदा बाजार) रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता किरण गोविंद घृतलहरें एवं सुलोचना यादव (अध्यक्ष, जनपद पंचायत बलौदा बाजार) ने की।
विशिष्ट अतिथियों में ईशांत वैष्णव, सुमन योगेश वर्मा, विजय यादव, शिव मंगल सिंह चौहान, प्रशांत यदु, अनुपम बाजपेई, हरीश कुमार फेकर सहित अनेक जनप्रतिनिधि व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सामूहिक नृत्य में ‘हमर छत्तीसगढ़’ बसना अव्वल
राज्य स्तरीय सामूहिक डांस प्रतियोगिता में
🥇 प्रथम पुरस्कार (₹20,000) — हमर छत्तीसगढ़ सामूहिक डांस ग्रुप, बसना
🥈 द्वितीय पुरस्कार (₹15,000) — कृष्णा डांस ग्रुप, पाटन
🥉 तृतीय पुरस्कार (₹10,000) — प्रतिमा डांस ग्रुप, जांजगीर-चांपा
चतुर्थ पुरस्कार (₹5,000) — आर.एन. डांस ग्रुप, बागबाहरा
पंचम पुरस्कार (₹3,000) — झारसुगुड़ा को प्रदान किया गया।
युगल व एकल नृत्य में भी दिखी प्रतिभा की चमक
युगल नृत्य में प्रथम पुरस्कार पवन व हिना (रायपुर) को मिला, वहीं
एकल नृत्य में प्रथम स्थान साधना (चंद्रपुर) ने प्राप्त किया। अन्य विजेताओं को भी अतिथियों द्वारा पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में नवयुवक जन जागरण समिति के संरक्षक हरिकिशन वर्मा, अध्यक्ष लोमश वर्मा, उपाध्यक्ष रामचंद्र वर्मा, सचिव राजेश कुमार वर्मा, कोषाध्यक्ष रामसनेही वर्मा सहित समिति के सभी पदाधिकारियों, ग्राम पंचायत कोलिहा की सरपंच कामिनी खेलावान वर्मा, पंचों एवं ग्रामीणों का विशेष सहयोग रहा।
यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रतीक बना, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने का सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुआ।

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