प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में प्रदीप कैवर्त्य की ऐतिहासिक बढ़त, छत्तीसगढ़ निषाद समाज में बदलाव की लहर तेज…
संवाददाता…धनकुमार कौशिक/बलौदा बाजार..
बलौदा बाजार(डोंगरा)!! छत्तीसगढ़ निषाद समाज पंजीयन क्रमांक 10579 (कोहका, भिलाई) के बहुप्रतीक्षित संगठनात्मक चुनाव ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है। प्रदेश भर में समाज के भीतर जबरदस्त राजनीतिक और सामाजिक हलचल देखने को मिल रही है। अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रचार सचिव सहित महिला संगठन के विभिन्न पदों के लिए कई प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष पद की बात करें तो सबसे मजबूत, चर्चित और जनसमर्थन प्राप्त प्रत्याशी के रूप में प्रदीप कैवर्त्य उभरकर सामने आए हैं।

यह चुनाव 28 दिसंबर, रविवार को संपन्न होना है। मुख्य चुनाव अधिकारी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रवि निषाद के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा मतदान की तैयारियां लगभग पूर्ण कर ली गई हैं। चुनाव को लेकर समाज के भीतर उत्साह के साथ-साथ पारदर्शिता को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। कुछ स्थानों से आजीवन सदस्यता शुल्क जमा होने के बावजूद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिसे लेकर समाज में असंतोष की चर्चा है। बावजूद इसके, समाज के लोग निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
प्रदीप कैवर्त्य के पक्ष में बन रहा है जनसैलाब
प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में प्रदीप कैवर्त्य जिस तरह से समाज के हर वर्ग का भरोसा जीतते जा रहे हैं, वह चुनाव को एकतरफा बना सकता है। गांव-गांव, नगर-नगर और समाज के प्रमुख केंद्रों में उनके समर्थन में माहौल साफ नजर आ रहा है। जहां भी वे जनसंपर्क के लिए पहुंच रहे हैं, वहां समाज के लोग उन्हें देखने, सुनने और समर्थन देने के लिए उमड़ पड़ रहे हैं।
समाज के बुजुर्गों से लेकर युवा और महिलाओं तक में प्रदीप कैवर्त्य को लेकर सकारात्मक चर्चा है। सामाजिक मतदाताओं का मानना है कि लंबे समय बाद ऐसा प्रत्याशी सामने आया है जो केवल वादों की राजनीति नहीं, बल्कि सेवा, संघर्ष और समर्पण की राजनीति करता दिखाई दे रहा है।
“कुर्सी नहीं, समाज सेवा मेरा लक्ष्य” – प्रदीप कैवर्त्य
पत्रकारों से चर्चा के दौरान प्रदीप कैवर्त्य ने दो टूक कहा कि वे इस चुनाव में किसी पद, प्रतिष्ठा या कुर्सी की चाह में नहीं आए हैं। उन्होंने कहा,
“मैं समाज की सेवा के लिए खड़ा हूं। समाज मेरे लिए गंगा के समान पवित्र है, और इसकी अस्मिता, एकता और गरिमा की रक्षा करना हर सामाजिक व्यक्ति का कर्तव्य है।”
उन्होंने यह भी कहा कि समाज का विकास केवल भाषणों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ईमानदार कार्य से होता है। उनका लक्ष्य समाज के हर व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना, शिक्षा को बढ़ावा देना, सामाजिक जागरूकता फैलाना और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की दिशा में ठोस पहल करना है।
पुराने वादों से ऊबी जनता, ईमानदार नेतृत्व की तलाश
समाज के भीतर यह भावना भी प्रबल होती जा रही है कि पूर्व में कई पदाधिकारी बड़े-बड़े वादों और प्रलोभनों के सहारे सत्ता में पहुंचे, लेकिन समाज को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। इस बार समाज का मतदाता सजग, जागरूक और निर्णय लेने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है।
प्रदीप कैवर्त्य ने इस संदर्भ में कहा कि लोकतंत्र हो या समाज तंत्र, जनता ही असली ताकत है। जनता का आशीर्वाद ही किसी भी व्यक्ति को पद तक पहुंचाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार समाज दिखावे के बजाय ईमानदारी, संघर्ष और सेवा को प्राथमिकता देगा।
समाज को दिख रहा है सही नेतृत्व
समाज के कई वरिष्ठों, बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं का मानना है कि वर्तमान समय में निषाद समाज को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो समाज को एकजुट कर सके, अधिकारों के लिए संघर्ष कर सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार तैयार करे। इन मानकों पर प्रदीप कैवर्त्य खरे उतरते दिखाई दे रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो आंतरिक सर्वे और जमीनी फीडबैक में भी प्रदीप कैवर्त्य की जीत की संभावना सबसे प्रबल बताई जा रही है। उनका समर्थन ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है और मुकाबला काफी हद तक उनके पक्ष में झुकता नजर आ रहा है।
28 दिसंबर को साफ होगा जनादेश
अब पूरे समाज की निगाहें 28 दिसंबर पर टिकी हैं, जब मतपेटियों में बंद फैसला सामने आएगा। फिलहाल माहौल, जनसमर्थन और सामाजिक संकेत यही बता रहे हैं कि छत्तीसगढ़ निषाद समाज के प्रदेश अध्यक्ष पद पर प्रदीप कैवर्त्य एक मजबूत और निर्णायक दावेदार के रूप में उभर चुके हैं।
समाज में बदलाव की जो लहर उठी है, वह केवल एक चुनाव तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि आने वाले समय में निषाद समाज की दिशा और दशा तय करने वाली साबित हो सकती है।







