गौरेला में आयुर्वेद का वैश्विक संदेश — नीदरलैंड की मेहमान को दी गई वैज्ञानिक जानकारी
ग्रामीण पर्यटन के साथ आयुर्वेद का संगम, आवाज़ आयुर्वेद संगठन की अनूठी पहल
अवास कैवर्त/ गौरेला–पेंड्रा–मरवाही
जिले के गौरेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम लमना स्थित विलेज स्टे में आयुर्वेद के वैश्विक प्रचार–प्रसार की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया। आवाज़ आयुर्वेद संगठन के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष परिचय कार्यक्रम में नीदरलैंड से आई विदेशी मेहमान जोहान्ना हेरमीना को भारत की प्राचीन, वैज्ञानिक और जीवनशैली आधारित चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद के सिद्धांतों, उपचार पद्धतियों और व्यावहारिक उपयोगिता की विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को आयुर्वेद से जोड़ते हुए भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना रहा। इस अवसर पर आयुर्वेद विशेषज्ञों ने बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों का इलाज नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की संपूर्ण वैज्ञानिक प्रणाली है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा — तीनों का संतुलन आवश्यक माना गया है।

कार्यक्रम में डॉ. सोमेश कुशवाहा, डॉ. संदीप साह, डॉ. विवेक साहू, डॉ. दीपा साहू, फार्मासिस्ट पूरन सिंह आयम, औषधालय सेवक अनिल कुमार यदु एवं पीटीएस संतोष यादव की सक्रिय भागीदारी रही। सभी ने सरल भाषा में आयुर्वेद की वैज्ञानिकता, आधुनिक जीवन में इसकी उपयोगिता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी बढ़ती स्वीकार्यता पर चर्चा की।
इसके बाद विदेशी मेहमान को शासकीय आयुर्वेद औषधालय बगरा का भ्रमण कराया गया। यहाँ औषधालय की सेवाओं, दवाइयों के निर्माण, रोगी पंजीयन, उपचार प्रक्रिया और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। डॉ. दीपा साहू के नेतृत्व में नाड़ी स्वेदन थेरेपी कराई गई, जिसमें शरीर शोधन, मांसपेशियों के शिथिलीकरण, तनाव मुक्ति एवं दर्द निवारण के लाभों को प्रत्यक्ष रूप से समझाया गया।
विदेशी मेहमान जोहान्ना हेरमीना ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि आयुर्वेद प्राकृतिक, सुरक्षित और टिकाऊ स्वास्थ्य प्रणाली है, जो आज के तनावपूर्ण जीवन में अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने ग्रामीण परिवेश में इस तरह की पहल को भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत को विश्व पटल पर ले जाने वाला सशक्त माध्यम बताया।
कार्यक्रम के अंत में आवाज़ आयुर्वेद संगठन ने बताया कि भविष्य में भी ग्रामीण पर्यटन स्थलों पर ऐसे आयुर्वेदिक परिचय एवं उपचार शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि विदेशी एवं देशी पर्यटकों को भारत की जीवनशैली चिकित्सा से जोड़ा जा सके। यह पहल गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले को आयुर्वेदिक पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।







