बेटी बचाओ’ का सच उजागर— केंद्रीय विश्वविद्यालय IGNTU में छात्रा असुरक्षित, शिक्षा मंत्री की चुप्पी पर NSUI का उग्र घेराव
केंद्रीय शिक्षा मंत्री जवाब दें— FIR के बाद भी कार्रवाई शून्य, IGNTU में छात्रा उत्पीड़न पर सरकार मौन क्यों?
नारे सत्ता के, सुरक्षा शून्य— IGNTU छात्रा उत्पीड़न मामले में केंद्र सरकार कटघरे में, NSUI ने खोला मोर्चा
अमरकंटक/पोंडकी
देश में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के बड़े-बड़े नारों की हकीकत एक बार फिर उजागर हो गई है। केंद्रीय विश्वविद्यालय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) में छात्रा उत्पीड़न के गंभीर मामले में एफआईआर दर्ज होने के एक माह बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होना, सीधे तौर पर केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री की विफलता को दर्शाता है।

IGNTU में अध्ययनरत एक छात्रा ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने उसे अपने केबिन में बुलाकर अनैतिक कृत्य करने का प्रयास किया। छात्रा की शिकायत के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मजबूरी में केवल एफआईआर दर्ज कराकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली, लेकिन न तो आरोपी शिक्षक को निलंबित किया गया, न बर्खास्त और न ही किसी स्वतंत्र जांच समिति का गठन किया गया।
NSUI का आरोप है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के संरक्षण में आरोपी को बचाने की साजिश है। सवाल यह है कि जब मामला एक केंद्रीय विश्वविद्यालय का है, तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री अब तक मौन क्यों हैं?
क्या छात्रा की सुरक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण सत्ता और पद की रक्षा है?

इसी सरकारी चुप्पी और प्रशासनिक संवेदनहीनता के विरोध में आज मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ NSUI के संयुक्त तत्वावधान में IGNTU परिसर में उग्र प्रदर्शन और घेराव किया गया। इस आंदोलन का नेतृत्व मध्यप्रदेश NSUI प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे एवं छत्तीसगढ़ NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे ने किया।
NSUI नेताओं ने कहा कि
“केंद्रीय शिक्षा मंत्री को देश की बेटियों को जवाब देना होगा कि यदि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राएं सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर ‘बेटी बचाओ’ सिर्फ चुनावी जुमला क्यों न माना जाए?”
प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष शशांक मिश्रा (लक्की मिश्रा), अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय NSUI अध्यक्ष राहुल हंसपाल,मरवाही विधानसभा NSUI अध्यक्ष आशीष श्रीवास,जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही अध्यक्ष अनुज ताम्रकार, प्रदेश सचिव शशांक शर्मा एवं NSUI कार्यकर्ता तथा जिला विधानसभा एवं ब्लॉक पदाधिकारियों के साथ आंदोलन में सक्रिय रूप से मौजूद रहे।
NSUI ने साफ शब्दों में ऐलान किया कि — यदि शीघ्र ही आरोपी शिक्षक को बर्खास्त कर निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो यह आंदोलन विश्वविद्यालय से निकलकर दिल्ली तक ले जाया जाएगा।
NSUI नेताओं ने कहा कि आज IGNTU में जो हो रहा है, वह देश के पूरे उच्च शिक्षा तंत्र की सच्चाई है—
जहां नारे तो बेटियों के नाम पर लगाए जाते हैं, लेकिन जब बेटियां न्याय मांगती हैं तो सरकार और मंत्री चुप हो जाते हैं।







