बलौदा बाजार जिला प्रेस क्लब का प्रशासन को अल्टीमेटम – 3 दिन में कार्यवाही नहीं तो होगा आंदोलन…
संवाददाता/धनकुमार कौशिक — बलौदा बाजार
बलौदा बाजार(डोंगरा) जिले में सूदखोरी, धमकी और पत्रकारों के खिलाफ दुष्प्रचार के मामले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। बलौदाबाजार प्रेस क्लब ने बुधवार को पुनः कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और साफ चेतावनी दी है कि यदि आगामी तीन दिनों में दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो पत्रकार समाज लोकतांत्रिक तरीके से सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करेगा।

पुराने ज्ञापन पर नहीं हुई कार्यवाही
प्रेस क्लब ने बताया कि 17 सितम्बर 2025 को ही पिंकी सिन्हा और हेमलाल सिन्हा के विरुद्ध गंभीर आरोपों के साथ औपचारिक ज्ञापन प्रस्तुत किया गया था। आरोपियों पर बेहिसाब सूदखोरी, जबरन वसूली, धमकी देने और पत्रकारों की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल करने जैसे मामले दर्ज किए गए थे। इसके बावजूद अब तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने से पत्रकार समाज में गहरा रोष है।
अपराधियों के हौसले बुलंद
प्रेस क्लब का कहना है कि कार्रवाई में हो रही देरी का सीधा फायदा आरोपी उठा रहे हैं। न केवल वे सूदखोरी जैसे गैरकानूनी धंधे को खुलेआम चला रहे हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर पत्रकारों को निशाना बनाकर चरित्र हनन की मुहिम भी चला रहे हैं। इस कारण पत्रकारों की व्यक्तिगत और सामाजिक प्रतिष्ठा पर हमला हो रहा है, जो लोकतंत्र की बुनियाद पर सीधा प्रहार है।
प्रशासन की जिम्मेदारी तय
प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने दो टूक कहा कि यदि आगामी तीन दिन में कार्यवाही नहीं होती है, तो प्रशासन की चुप्पी यह साबित करेगी कि अपराधियों को मौन समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं होगा और प्रशासन को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी।
नेताओं व जनप्रतिनिधियों की संभावित प्रतिक्रिया
सूत्रों के अनुसार, जिले के कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी प्रेस क्लब की मांगों को जायज ठहराया है। उनका मानना है कि पत्रकार समाज की सुरक्षा और सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। कुछ जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो वे भी पत्रकारों के समर्थन में खड़े होंगे।
वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे “सूदखोरी के खिलाफ जन-जागरण” की शुरुआत बताते हुए कहा है कि पत्रकारों की लड़ाई अब पूरे समाज की लड़ाई बन गई है।
आंदोलन का संकेत
प्रेस क्लब ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों में दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पत्रकार संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत धरना-प्रदर्शन, रैली और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की होगी।
पत्रकारों में गुस्सा और एकजुटता
घटनाक्रम के बाद जिले भर के पत्रकारों में आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है। विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकार इस मुद्दे पर एक मंच पर आए हैं और एक स्वर में कहा है कि “जनता की आवाज को दबाने की कोशिश” को सफल नहीं होने दिया जाएगा।







