कुदरी हाईस्कूल में चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशाला संपन्न, शिक्षकों ने नैतिक मूल्यों के प्रसार का लिया संकल्प

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गौरेला पेड्रा मरवाही/प्रयास कैवर्त

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रमुख उद्देश्यों में बच्चों में मानवीय मूल्यों का समावेश एवं उनका समग्र विकास सुनिश्चित करना शामिल है, ताकि भविष्य में एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक का निर्माण हो सके। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए राज्य शैक्षिक एवं अनुसंधान केंद्र तथा अभ्युदय संस्थान अछोटी, जिला दुर्ग के तत्वावधान में शासकीय हाईस्कूल कुदरी में चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में संकुल कुदरी के अंतर्गत आने वाले सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का शुभारंभ आत्ममंथन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों—“मैंने शिक्षक की जिम्मेदारी क्यों स्वीकारी?”, “एक बच्चे का वास्तविक शिक्षक कौन है?” एवं “शिक्षक होने का वास्तविक अर्थ क्या है?”—पर गहन विचार-विमर्श के साथ किया गया। इन प्रश्नों ने शिक्षकों को अपनी भूमिका और दायित्वों को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान किया।

कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा जीवन के समग्र दृष्टिकोण पर जोर देते हुए बताया गया कि “जीवन को टुकड़ों में नहीं, बल्कि संपूर्णता में जीना चाहिए।” यह विचार रखा गया कि व्यक्ति का अस्तित्व समाज, परिवार और प्रकृति से जुड़ा हुआ है—“सभी के होने से ही मेरा होना सुनिश्चित होता है।” इसी क्रम में स्वयं, परिवार, समाज, प्रकृति, राष्ट्र एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलन और व्यवस्था बनाए रखने के महत्व पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।

प्रशिक्षकों ने यह भी बताया कि वर्तमान समय में समाज में बढ़ते अपराध, नैतिक मूल्यों में गिरावट तथा प्रकृति में बढ़ते असंतुलन जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान चेतना विकास मूल्य शिक्षा के माध्यम से संभव है। यह शिक्षा न केवल विद्यार्थियों में नैतिकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करती है, बल्कि उन्हें समाज के प्रति सजग और उत्तरदायी नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करती है।

कार्यशाला में निष्ठा ताम्रकार (सहायक शिक्षक, कुदरी), अंगद कैवर्त (प्राचार्य, मनेंद्रगढ़) एवं सुदर्शन कैवर्त (शिक्षक, मरवाही) ने अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षकों को मूल्य आधारित शिक्षा के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने शिक्षकों को बताया कि किस प्रकार कक्षा शिक्षण के दौरान बच्चों में मानवीय मूल्यों को सहज रूप से विकसित किया जा सकता है।

इस अवसर पर बी.एल. पात्रे (प्राचार्य, कुदरी), संकुल समन्वयक सेमलाल साहू सहित संकुल कुदरी के समस्त शिक्षक उपस्थित रहे। सभी शिक्षकों ने प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए इसे अपने शिक्षण कार्य में लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम के समापन पर शिक्षकों ने संकल्प लिया कि वे विद्यार्थियों में नैतिकता, अनुशासन, संवेदनशीलता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों का विकास करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे, ताकि एक सशक्त और मूल्य आधारित समाज का निर्माण किया जा सके।

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Author: Awas Kaiwart

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