बलौदा बाजार जिले में गौ माता की हालत दर्दनाक : 70 से 80 गायें बंधक, कई भूख से मौत – शासन-प्रशासन मौन, गौ संरक्षण अधिनियम लागू करने की उठी मांग…

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बलौदा बाजार जिले में गौ माता की हालत दर्दनाक : 70 से 80 गायें बंधक, कई भूख से मौत – शासन-प्रशासन मौन, गौ संरक्षण अधिनियम लागू करने की उठी मांग…

संवाददाता–धनकुमार कौशिक/ बलौदा बाजार 

बलौदाबाजार(डोंगरा)!!, 20 सितम्बर 2025/ छत्तीसगढ़ राजधानी के बलौदा बाजार जिले में मवेशियों की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। सड़कों पर दुर्घटनाओं और आवारा पशुओं की समस्या बढ़ रही है, वहीं गौ माता की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर शासन-प्रशासन की उदासीनता सामने आ रही है। 

साधु-संतऔर सामाजिक कार्यकर्ता लगातार आवाज उठा रहे हैं कि गाय को पशु के बजाय राष्ट्र माता का दर्जा मिले और उनके नाम पर राजनीति बंद हो, ताकि उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित हो सके।बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के ग्रामके नगर पंचायत लवन,कसडोल, लाहौद,रिश्दा, ग्राम जारा, ग्राम परसाभदेर, ग्राम सोनार देवरी के बाद अब ग्राम किरवई में मवेशियों की दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। ग्राम पंचायत किरवई, थाना सिमगा के अंतर्गत आज सुबह 70 से 80 गायों को बंधक बनाकर रखा गया, जिनमें से कई गायें भूख-प्यास से तड़पकर मर चुकी हैं। इस घटना के लिए ग्राम सरपंच पति उमेश सायतोड़े, उप सरपंच पति हेमलाल साहू, पंच पदुम साहू, शरण साहू सहित कई अन्य ग्रामवासी जिम्मेदार बताए जा रहे हैं।ज्ञात हो कि किरवई में लगने वाली मवेशी बाजार को गौ तस्करी की शिकायत पर शासन ने पूर्व में ही बंद कर दिया था। साथ ही, बकरीद के दिन बैल काटने का मामला भी सामने आया था, जिसके आरोपी अभी जेल में बंद हैं। मगर अब एक बार फिर गंभीर लापरवाही उजागर हुई है।गांव के पूर्व धर्म सेवा प्रमुख जागेश्वर साहू ने इस पूरे मामले को लेकर सिमगा थाने में लिखित आवेदन दिया है। गौ सेवकों का आरोप है कि मामले को दबाने की कोशिश हो रही है। सूत्रों के अनुसार, बलौदाबाजार एसपी और भाटापारा एसडीओपी को अपना रिश्तेदार बताकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है। इस बीच, गौ सेवक सिमगा थाने का घेराव करने की तैयारी कर रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में गायों की दुर्दशा लगातार बढ़ रही है। सड़क पर घूमते मवेशी आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। घायल और मृत गायों को यूं ही फेंक दिया जाता है, जिससे बदबू और गंदगी फैलती है, कीड़े-मकौड़े पनपते हैं और लोग बीमार हो रहे हैं।हिंदू धर्म में गायों को पवित्रता, समृद्धि और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गाय के शरीर में सभी देवी-देवता का वास होता है और गौ सेवा सभी देवी-देवताओं की सेवा मानी जाती है। बावजूद इसके, शासन-प्रशासन की उदासीनता ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कब लागू होगा गौ संरक्षण अधिनियम और मवेशियों की मौत पर किसके ऊपर अपराध दर्ज होगा।मामले की गंभीरता को देखते हुए अब निगाहें प्रशासन की ओर टिकी हैं कि वह इस पर किस तरह संज्ञान लेकर कार्यवाही करता है। खबर अभी बाकी है, संबंधित सभी पक्षों का बयान लेकर इसे अगले अंक में पुनः प्रकाशित किया जाएगा।

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Author: Aashis Shrivas

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